बढ़ती उम्र में भी रह सकते हैं चुस्तदुरूस्त

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बढ़ती उम्र में भी रह सकते हैं चुस्त-दुरूस्त

आयु बढऩा एक स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन इस क्रिया की गति को कम करने का प्रयास किया जा सकता है। इसके लिए आवश्यक है एक क्रियाशील जीवन शैली की।
इस क्षेत्र में हुई रिसर्चों से यह पता चला है कि नियमित व्यायाम, प्रतिदिन 35 मिनट की सैर, धूम्रपान पर रोक और भोजन में बदलाव लाकर हम बढ़ती उम्र में युवा दिख सकते हैं। बढ़ती उम्र में तनाव, हृदय रोगों, मधुमेह, कैंसर, सांस की बीमारियों, आर्थराइटिस और दिमागी असंतुलन का सामना करना पड़ता है। 60 के बाद मोतियाबिंद जैसी आंखों की समस्या का सामना करना पड़ता है।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्त रहने का आसान उपाय है क्रियाशील रहना। उम्र बढऩे के साथ-साथ आप यह महसूस न करें कि आपकी उम्र बढऩे के साथ-साथ आपकी क्रियाशीलता कम हो रही है बल्कि बढ़ती उम्र में भी चुस्त व क्रियाशील रहने का प्रयास करें।
बढ़ती उम्र कोई बीमारी नहीं कि सब काम छोड़ कर आराम करें। अगर आपके काम करने की गति धीमी हो रही है तो यह नहीं कि आप सब कार्य छोड़ दें बल्कि उस गति को सही करने के लिए शारीरिक श्रम बहुत जरूरी है। लोगों से मिलना-जुलना व सही भोजन भी जरूरी है।

इन सबसे जरूरी है परिवार के सदस्यों का सहयोग जो न केवल वृद्ध लोगों की सही देखभाल करें बल्कि उन्हें यह अहसास दिलाएं कि वे इस उम्र में भी पूरे परिवार का बोझ उठा सकते हैं। इससे उन्हें अपनी जिम्मेदारियां निभाने की भी प्रेरणा मिलेगी और वे अधिक क्रियाशील रहने का प्रयास करेंगे। उम्र बढऩे के साथ आप अपने सामाजिक दायरे को कम करने का प्रयास न करें बल्कि उसे और बढ़ाएं क्योंकि इस उम्र में व्यस्त रहने के लिए आपको मित्रों की भी जरूरत होती है।

किसी क्लब या धार्मिक संस्था का सदस्य बन सकते हैं या फिर कोई सामाजिक सेवा कर सकते हैं। इससे आपको यह एहसास रहेगा कि आप क्रियाशीलता के मामले में युवाओं को भी पीछे छोड़ते हैं।
-सोनी मल्होत्रा

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