जब हो आधे सिर का दर्द

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जब हो आधे सिर का दर्द

आधे सिर का दर्द एक अत्यंत तीव्र और वेदनाकारी रोग है जिसे ‘माइग्रेन’ के नाम से भी जाना जाता है। चूंकि यह दर्द एक साथ पूरे सिर में न होकर सिर के आगे या पीछे अथवा माथे के दायीं या बांयी आंख के पीछे महसूस होता है, इसी कारण इसे आधे सिर का दर्द या ‘आधासीसी’ दर्द कहा जाता है। यह दर्द प्रत्येक बार अपना स्थान बदलता रहता है। यह दर्द एक समय के अंतराल से शुरू होता है और दो-चार घंटे से लेकर चौबीस घंटे तक परेशान करके स्वयं शांत हो जाता है। इसी अवधि में यह रोगी को झकझोर कर रख देता है।
कुछ लोगों को ‘माइग्रेन’ की पीड़ा एक ही दिन में कई बार कुछ-कुछ मिनटों में ही झेलनी पड़ती है। कई बार आधे सिर के दर्द के शुरू होते ही रोगी की किसी आंख की ज्योति प्रभावित होने लगती है या फिर उसे उलटियां आने लग जाती हैं। यद्यपि सिरदर्द या माइग्रेन के पीछे छिपे कारणों को तो अभी तक ठीक से समझा नहीं जा सका है परंतु इसके लगभग पचास प्रतिशत मामलों में यह देखा गया है कि ‘मानसिक तनाव’ ही इसका मुख्य कारण रहता है।

अभी हाल ही की खोजों से यह पता चला है कि स्त्रियों में सिरदर्द का गहरा संबंध मासिक चक्र की अनियमितता और प्रजनन संस्थान के रोगों, मुख्यत: गर्भाशय की रसौली के साथ रहता है। इस अध्ययन से एक बात यह स्पष्ट हो जाती है कि सिरदर्द का कुछ न कुछ संबंध हार्मोनल असंतुलन के साथ भी होता है।
इस सिरदर्द की शुरूआत कनपटियों के आस-पास या भृकुटियों के मध्य से धीरे-धीरे होती है जो क्र मश: तीव्र होती जाती है। इस समय रोगी को ऐसा लगता है कि उसका सिर फट जाएगा। रोगी दर्द की पीड़ा और कष्ट से अत्यंत व्याकुल हो उठता है।
इस समय रोगी का चेहरा दर्द के कारण फीका पडऩे लगता है। अधिकतर रोगियों को दर्द की तीव्रता के साथ-साथ उलटियां भी आने लग जाती हैं और आंखों के आगे चिंगारी-सी उठती प्रतीत होने लगती है। इस अवस्था में रोगी प्रकाश और शोर-शराबे से दूर भागने का प्रयास करता है।

इस समय उसको कोई काम करने की इच्छा नहीं होती और वह आंख बंद करके शांत लेटा रहना चाहता है। कुछ घंटों के बाद यह दर्द स्वयं ही समाप्त हो जाता है। आधे सिर के दर्द में निम्नांकित उपचार अत्यंत ही लाभदायक होते हैं:-
– अगर यह दर्द सूर्योदय के साथ-साथ शुरू हो तो सहिजन की छाल को पत्थर पर चन्दन की तरह घिसकर माथे पर लगाने से आराम हो जाता है।
– ‘माइग्रेन’ का रोगी जामुन, चैरी, स्ट्राबरी आदि खट्टे फलों को रोज सौ ग्राम की मात्रा में सेवन करता रहे तो यह दर्द होता ही नहीं है।
– ‘माइग्रेन’ के रोगी को चॉकलेट, बासी पनीर, लाल रंग की शराब तथा मुर्गे के मांस से परहेज़ रखना चाहिए। इन चीजों से परहेज़ न रखने पर माइग्रेन का झटका बार-बार लग सकता है।
– ताजा अदरक का रस एक चम्मच, तथा शहद एक चम्मच मिलाकर अथवा सोंठ का बारीक चूर्ण गुनगुने पानी या चाय के साथ एक चम्मच की मात्र में मिलाकर सेवन करने से ‘माइग्रेन’ का दर्द दूर हो जाता है।
– आनंद कु. अनंत

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